मीरा-भाईंदर में फ्लाईओवर विवाद : जनहित या राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई?
मीरा-भाईंदर। मीरा-भाईंदर में हाल ही में शुरू किए गए फ्लाईओवर को लेकर राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई है। एक ओर मंत्री प्रताप सरनाईक द्वारा फ्लाईओवर की गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर जांच की मांग की जा रही है, वहीं दूसरी ओर भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं विधायक नरेंद्र मेहता इस मुद्दे को अनावश्यक राजनीतिक विवाद बताकर जनता के बीच भ्रम फैलाने का आरोप लगा रहे हैं। सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि यदि फ्लाईओवर का उद्घाटन सभी आवश्यक तकनीकी परीक्षणों, निरीक्षणों और विशेषज्ञ संस्थाओं की रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद किया गया है, तो अब अचानक उसकी सुरक्षा पर सवाल क्यों उठाए जा रहे हैं? और यदि वास्तव में निर्माण कार्य में कोई गंभीर खामी है, तो केवल जांच की मांग करने के बजाय दोषी ठेकेदारों और संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध तत्काल कार्रवाई की मांग क्यों नहीं की जा रही? जनता यह भी जानना चाहती है कि यदि निर्माण कार्य में अनियमितताएं हुई हैं तो उनकी जिम्मेदारी किसकी है? क्या केवल राजनीतिक बयानबाजी से समस्या का समाधान होगा या फिर दोषियों को जवाबदेह ठहराया जाएगा? दूसरी ओर यह भी देखा जा रहा है कि मीरा-भाईंदर में कुछ अन्य अधूरी अधोसंरचना परियोजनाओं को लेकर उतनी मुखरता दिखाई नहीं देती, जितनी इस फ्लाईओवर को लेकर दिखाई जा रही है। इससे राजनीतिक उद्देश्यों को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद केवल फ्लाईओवर की गुणवत्ता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे क्षेत्रीय राजनीति में प्रभाव और वर्चस्व स्थापित करने की प्रतिस्पर्धा भी दिखाई देती है। मंत्री प्रताप सरनाईक और पूर्व विधायक नरेंद्र मेहता दोनों ही मीरा-भाईंदर की राजनीति के प्रभावशाली चेहरे हैं। ऐसे में जनता के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या यह विवाद वास्तव में जनहित से जुड़ा है या फिर राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन का एक नया अध्याय है?
लोकतंत्र में जनप्रतिनिधियों का दायित्व जनता की सुरक्षा और विकास सुनिश्चित करना है। यदि फ्लाईओवर में कोई तकनीकी कमी है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई भी होनी चाहिए। वहीं यदि सभी आरोप निराधार सिद्ध होते हैं, तो जनता के बीच भ्रम फैलाने वालों को भी जवाब देना चाहिए। मीरा-भाईंदर की जनता अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से अधिक पारदर्शिता, जवाबदेही और विकास चाहती है। नागरिकों की अपेक्षा है कि जनप्रतिनिधि वर्चस्व की लड़ाई से ऊपर उठकर शहर के विकास और नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।
.. कौशल विनोद पाठक

