कश्मीर में गहराया मटन संकट, पशुधन आयात ठप होने से आपूर्ति पर खतरा ?
श्रीनगर। कश्मीर घाटी में आने वाले हफ्तों में मटन की गंभीर कमी उत्पन्न होने की आशंका बढ़ गई है, क्योंकि पशुधन व्यापारियों ने नई खेपों का आयात फिलहाल रोक दिया है। पशुधन आयात करने वाले व्यापारियों का कहना है कि बढ़ती परिवहन लागत, पंजाब में कथित उत्पीड़न और बार-बार शिकायतों के बावजूद समाधान न निकलने के विरोध में यह निर्णय लिया गया है। सामान्य परिस्थितियों में कश्मीर घाटी के लिए रोजाना करीब 80 ट्रक भेड़ और बकरियां राजस्थान और दिल्ली से भेजी जाती हैं।
व्यापारियों के अनुसार, पंजाब से गुजरने वाले प्रत्येक ट्रक पर 20,000 से 30,000 रुपये तक का अतिरिक्त खर्च आ रहा है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पर भारी दबाव पड़ रहा है। कई बार इस मुद्दे को सरकार के समक्ष उठाने के बावजूद अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका है। कश्मीर मटन डीलर्स एसोसिएशन (केएमडीए) ने घोषणा की है कि जब तक सरकार हस्तक्षेप कर लंबित समस्याओं का समाधान नहीं करती, तब तक देश के प्रमुख पशुधन बाजारों से जम्मू-कश्मीर के लिए नए पशुधन वाहनों की लोडिंग और रवाना करना बंद रहेगा। एसोसिएशन के महासचिव मेहराज-उद-दीन ने बताया कि वाहनों को विभिन्न जांच चौकियों पर घंटों रोका जाता है, जिससे न केवल व्यापारियों को नुकसान होता है बल्कि पशुओं की सेहत पर भी गंभीर असर पड़ता है।
केएमडीए ने चेतावनी दी है कि यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो आगामी मुहर्रम के बाद कश्मीर घाटी में मटन की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है, क्योंकि क्षेत्र अपनी मांग के लिए बड़े पैमाने पर बाहरी राज्यों से आने वाले पशुधन पर निर्भर है। एसोसिएशन ने लोगों से भी अपील की है कि वे आने वाले शादी-विवाह और सामाजिक आयोजनों की योजना बनाते समय संभावित मटन संकट को ध्यान में रखें।

