पुलिस ने पकड़े 5 जालसाज – बैंक मैनेजर की सतर्कता से खुला साइबर ठगी नेटवर्क?
नई दिल्ली। सरिता विहार थाना पुलिस ने बैंक खातों के जरिये साइबर ठगी की रकम निकालकर अपराधियों तक पहुंचाने वाले एक गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए पांच आरोपितों को गिरफ्तार किया है। आरोपित कमीशन के बदले अपने बैंक खातों का इस्तेमाल कर ठगी की रकम निकालते थे। पुलिस जांच में सामने आया है कि इनके कब्जे में आया पैसा मुंबई में हुई 10.40 करोड़ रुपये की बड़ी साइबर ठगी से जुड़ा हुआ है। पुलिस के मुताबिक मामले का भंडाफोड़ आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के एक शाखा प्रबंधक की सतर्कता से हुआ। बैंक मैनेजर ने कुछ संदिग्ध युवकों द्वारा एक खाते से बड़ी रकम निकालने की कोशिश किए जाने की सूचना सरिता विहार थाने के बीट कांस्टेबल को दी।
दक्षिण-पूर्वी जिला पुलिस उपायुक्त डाॅ. हेमंत तिवारी के मुताबिक शुरुआती जांच में पता चला है कि आरोपित साइबर ठगी से विभिन्न खातों में जमा होने वाली रकम को निकालकर असली ठगों तक पहुंचाने का काम करते थे। इसके बदले उन्हें कमीशन मिलता था। पुलिस को संदेह है कि यह नेटवर्क देश के विभिन्न राज्यों में सक्रिय साइबर अपराधियों से जुड़ा हुआ है। जांच के दौरान जिस बैंक खाते से रकम निकाली जा रही थी, उसका संबंध मुंबई में हाल ही में सामने आए 10.40 करोड़ रुपये के साइबर फ्राड से पाया गया। पुलिस के अनुसार मुंबई स्थित एक निजी कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी को कंपनी के सीईओ की तस्वीर लगे व्हाट्सएप नंबर से काल किया गया था। जालसाजों ने खुद को कंपनी का शीर्ष अधिकारी बताकर विश्वास में लिया और तीन जून से 15 जून के बीच 63 अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए करीब 10.40 करोड़ रुपये विभिन्न खातों में ट्रांसफर करा लिए।
धोखाधड़ी का पता चला चलने के बाद 16 जून को मुंबई में मामला दर्ज किया गया था। अब दिल्ली में हुई गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियों को साइबर ठगी के पूरे नेटवर्क तक पहुंचने की उम्मीद है। पुलिस ने बताया कि गिरोह का एक अन्य सदस्य रंजन अभी फरार है, जिसकी तलाश में लगातार छापेमारी की जा रही है। मामले की जांच जारी है। सूचना मिलते ही पुलिस सक्रिय हुई और बैंक पहुंचकर नौ लाख रुपये का चेक लेकर रकम निकालने आए विकास और वंश को हिरासत में ले लिया। पूछताछ और उनकी निशानदेही पर फैयाज आलम, अमित और बलवीर कुमार को भी गिरफ्तार कर लिया गया।

