क्या सचमुच गोदरेज समूह के पास मुंबई में 3,400 एकड़ जमीन है..
विरासत, पर्यावरण और भविष्य की विकास संभावनाओं का अनूठा संगम?
मुंबई। मुंबई जैसे महानगर में जहाँ जमीन का हर वर्गफुट करोड़ों रुपये का महत्व रखता है, वहाँ यदि किसी एक निजी औद्योगिक समूह के पास लगभग 3,400 एकड़ भूमि होने की बात सामने आती है, तो स्वाभाविक रूप से लोगों की जिज्ञासा बढ़ जाती है। उपलब्ध ऐतिहासिक अभिलेखों, उद्योग जगत की रिपोर्टों और मीडिया स्रोतों के अनुसार, गोदरेज एंड बॉयस के स्वामित्व वाली मुख्यतः विखरोली स्थित लगभग 3,400 एकड़ भूमि मुंबई की सबसे बड़ी निजी भूमि होल्डिंग्स में गिनी जाती है। हालाँकि इस तथ्य को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण पहलू जानना आवश्यक है। इस पूरी भूमि पर निर्माण संभव नहीं है। इसका बड़ा हिस्सा मैंग्रोव, आर्द्रभूमि (वेटलैंड) और पर्यावरण संरक्षण क्षेत्र के अंतर्गत आता है, जिस पर कानूनन विकास कार्यों की अनुमति नहीं है। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, लगभग 1,000 एकड़ भूमि ही विकास योग्य मानी जाती है, जबकि शेष क्षेत्र पर्यावरणीय संरक्षण के कारण सुरक्षित रखा गया है।
यही कारण है कि गोदरेज समूह की इस भूमि को केवल एक रियल एस्टेट संपत्ति के रूप में नहीं, बल्कि औद्योगिक विरासत, पर्यावरण संरक्षण और दीर्घकालिक शहरी नियोजन के प्रतीक के रूप में भी देखा जाता है। विखरोली क्षेत्र में वर्षों से मैंग्रोव संरक्षण के लिए गोदरेज समूह की पहल को भी व्यापक रूप से रेखांकित किया जाता रहा है।
हाल के वर्षों में गोदरेज परिवार के पुनर्गठन और व्यावसायिक समझौतों के बाद इस भूमि के विकास को लेकर नई योजनाओं पर भी चर्चा तेज हुई है। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि यदि विकास योग्य हिस्से का चरणबद्ध और नियोजित विकास होता है, तो यह मुंबई के पूर्वी उपनगरों के शहरी स्वरूप और रियल एस्टेट बाजार पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है।
मुंबई की यह भूमि केवल आर्थिक दृष्टि से मूल्यवान नहीं है, बल्कि यह इस बात का भी उदाहरण है कि औद्योगिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन कैसे बनाया जा सकता है। भविष्य में इस क्षेत्र का विकास मुंबई के शहरी विस्तार, रोजगार, आवास और पर्यावरणीय संतुलन—चारों क्षेत्रों को प्रभावित कर सकता है। इसलिए गोदरेज समूह की विखरोली भूमि आने वाले वर्षों में भी नीति-निर्माताओं, निवेशकों और शहरी विकास विशेषज्ञों के लिए चर्चा का महत्वपूर्ण विषय बनी रहेगी।
विश्लेषण: कौशल विनोद पाठक

