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Sunday, June 14, 2026

प्रयागराज हनुमान मंदिर में चढ़ावे में नकली करेंसी, जांच में जुटी एनआइए?

 प्रयागराज हनुमान मंदिर में चढ़ावे में नकली करेंसी, जांच में जुटी एनआइए?

   प्रयागराज। सिविल लाइंस स्थित श्रीहनुमत निकेतन मंदिर के अलग-अलग दानपात्रों में कुल नौ नकली नोट मिले हैं। पांच सौ का एक, दो सौ के पांच तथा सौ के तीन नकली नोट मिले हैं। दरअसल मंदिर प्रबंधन के विवाद के बाद 20 मार्च 2024 न्यायालय ने डीएम प्रयागराज को इसका रिसीवर बैठा दिया। डीएम मनीष कुमार वर्मा ने रिसीवर का अधिकार एडीएम आपूर्ति विजय शर्मा को दिया है। मंदिर में चढ़ावे की राशि तथा खर्च को लेकर वर्ष 2020 से विवाद शुरू हुआ। मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों में चढ़ावे की धनराशि में हिस्सा और वर्चस्व की लड़ाई सामने आई। इसके बाद प्रकरण में न्यायालय में चला गया। लगभग चार वर्ष तक अदालत में सुनवाई चली। न्यायालय के निर्देश पर जिला प्रशासन के रिसीवर ही मंदिर का प्रबंधन देख रहे हैं। मंदिर में चढ़ावा की धनराशि हर माह ट्रस्ट के बैंक खाते में जमा कराने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। पिछले दो वर्षों के 24 दान पात्र अभी सील रखे हुए हैं, जिनमें चढ़ावे की राशि की गिनती अभी नहीं हो सकी है। अब तक जनवरी, फरवरी व मार्च 2026 के छह दान पात्रों के चढ़ावे की ही गिनती हुई है। इसमें 13 लाख रुपये मिले, जिन्हें बैंक में जमा करा दिया गया है। ये पैसे जब बैंक में जमा कराए गए तो गिनती के दौरान मशीन ने नकली नोटों की पहचान कर ली, जिसके बाद बैंक प्रबंधन ने एडीएम आपूर्ति को इसकी जानकारी दी। एडीएम की रिपोर्ट पर राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआइए) ने इसकी जांच शुरू कर दिया है। नकली नोटों के पाए जाने पर अन्य जांच एजेंसियां भी सक्रिय हो गई हैं। एनआइए के अधिकारियों ने इस संबंध में प्रशासनिक अधिकारियों से संपर्क साधा है। प्रशासन की ओर से अहम सूचनाएं दी गई हैं। एनआइए ने नकली नोटों की स्क्रीनिंग भी की है।

    प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि दानपात्र में जो भी नकली नोट मिले हैं, वे चढ़ावे में किसी ने बिना जानकारी के दे दिया। हालांकि इससे यह साफ हो गया है कि शहर में जाली नोटों का चलन फिर शुरू हो चुका है। इससे संबंधित गिरोह नकली नोट खपाने में जुट गए हैं। एडीएम आपूर्ति व मंदिर के नामित रिसीवर विजय शर्मा ने बताया कि श्रीहनुमत निकेतन मंदिर के दानपात्र में चढ़ावे की धनराशि में मिले नकली नोटों की सूचना बैंक प्रबंधन ने दी थी, जिसके बाद जांच एजेंसियों को इसकी सूचना दी गई।

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