बरगद का पेड़ नहीं है? तो इन 5 आसान तरीकों से पूरी करें पूजा – वट सावित्री व्रत ..
नई दिल्ली। वट सावित्री व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह व्रत पति की लंबी आयु और सुखी दांपत्य जीवन के लिए रखा जाता है। इस साल वट सावित्री व्रत 16 मई 2026 को मनाया जाएगा। इस व्रत में वट वृक्ष यानी बरगद के पेड़ की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि ज्येष्ठ अमावस्या के दिन बरगद के पेड़ के नीचे ही देवी सावित्री ने अपने पति सत्यवान को पुनर्जीवन दिलाया था। यही वजह है कि इस दिन महिलाएं बरगद के पेड़ की पूजा करके उसके चारों ओर कच्चा सूत लपेटती हैं। लेकिन, कई बार आसपास बरगद का पेड़ नहीं होता या महिलाएं यात्रा में होती हैं। ऐसे में पूजा कैसे करें, इसे लेकर लोगों के मन में सवाल रहता है। अगर आसपास बरगद का पेड़ न हो तो व्रत से एक दिन पहले वट वृक्ष की टहनी मंगवा सकते हैं। उसे मिट्टी भरे गमले में लगाकर पानी दें। व्रत वाले दिन उसी को वट वृक्ष मानकर पूजा करें और कच्चा सूत लपेटें। पूजा के बाद उस टहनी को बहते जल में प्रवाहित किया जा सकता है। शास्त्रों में मानसिक पूजा का भी महत्व बताया गया है। अगर किसी कारण वट वृक्ष उपलब्ध न हो तो मन में बरगद के पेड़ की कल्पना करके श्रद्धा भाव से पूजा की जा सकती है। बाजार में वट सावित्री व्रत की तस्वीरें मिल जाती हैं, जिनमें सावित्री-सत्यवान और बरगद का पेड़ बना होता है। ऐसी तस्वीर को सामने रखकर भी विधि-विधान से पूजा की जा सकती है।
एक चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर हल्दी से वट वृक्ष की आकृति बनाई जा सकती है। इसके बाद उसी की पूजा और परिक्रमा करके सूत अर्पित किया जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार वट वृक्ष में त्रिदेवों का वास माना गया है। इसकी जड़ों में ब्रह्मा जी, तने में भगवान विष्णु और शाखाओं में भगवान शिव का निवास बताया गया है। मान्यता है कि वट वृक्ष की पूजा से अखंड सौभाग्य, संतान सुख और ग्रह दोषों से राहत मिलती है।

