नारी सुरक्षा केवल कानून नहीं, राष्ट्रीय चेतना का विषय!
विशेष लेख, भारत की संस्कृति में नारी को शक्ति, करुणा और सृजन का प्रतीक माना गया है। लेकिन आज समाज में बढ़ते महिला अपराध हमारी आत्मा को झकझोर रहे हैं। बलात्कार और उत्पीड़न की घटनाएँ केवल समाचार नहीं, बल्कि समाज के नैतिक पतन का दर्पण हैं। कानून बने हैं, सजा का प्रावधान भी है, फिर भी अपराध क्यों नहीं रुक रहे? इसका कारण केवल कानून की कमी नहीं, बल्कि सामाजिक सोच की कमजोरी है।
जब तक महिलाओं को सम्मान की दृष्टि से देखने की शिक्षा घर-घर में नहीं दी जाएगी, तब तक भय समाप्त नहीं होगा। आज आवश्यकता है कठोर दंड के साथ सामाजिक जागरण की। नारी सम्मान को राजनीति से ऊपर उठाकर राष्ट्रीय अभियान बनाना होगा।
….. विनोद पाठक

