नई वर्दी, नई पहचान – भारतीय सेना ने अपनाई बंदी जैकेट!
नई दिल्ली। भारतीय सेना ने औपनिवेशिक दौर की परंपराओं को खत्म करने के लिए अपनी ड्रेस से जुड़े नियमों में बदलाव किए हैं। इसके तहत औपचारिक मौकों पर बंद-गले वाली बंदी जैकेट पहनने की मंजूरी दी गई है, सेरेमोनियल पाउच बेल्ट को हटाया गया है और परेड के दौरान रिव्यूइंग अधिकारियों के लिए तलवार साथ रखना वैकल्पिक कर दिया गया है। टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार मैनुअल में बताया गया, देश की भावनाओं और बदलती संप्रभु पहचान को ध्यान में रखते हुए, कई सोच-समझकर किए गए बदलाव शामिल किए गए हैं। कुल मिलाकर ये बदलाव औपनिवेशिक दौर की बची-खुची निशानियों की प्रगतिशील समीक्षा को दर्शाते हैं, साथ ही भारतीय सेना की गरिमा, कार्यक्षमता और स्थायी परंपराओं को भी बनाए रखते हैं। बदलावों के तहत सेना ने सभी रैंक के सैनिकों के लिए 3बी नाम की एक नई विंटर ड्रेस (सर्दियों की वर्दी) शुरू की है। इसमें अंगोला शर्ट के साथ बैटल जैकेट और बेरेट शामिल है। यूनिफॉर्म के अलावा नियमों में कर्मचारियों के लुक और ग्रूमिंग से जुड़े कई तरह के स्टैंडर्ड शामिल हैं।
नियमों के तहत महिला अधिकारी सादे रंगों की साड़ियां या दुपट्टे के साथ कुर्ता-सलवार और टखने तक की लंबाई वाली सीधी पैंट पहन सकती हैं। इनमें बिना आस्तीन वाले कुर्ते और पलाजो या सिगरेट पैंट जैसे कैज़ुअल लोअर पहनने पर साफ तौर पर रोक लगाई गई है। मेस ड्रेस नंबर 5 और नंबर 6 से पाउच बेल्ट हटा दी गई है। आसानी और पहचान के लिए सेना में हर यूनिफॉर्म को एक खास ड्रेस नंबर दिया जाता है। आर्मर्ड कॉर्प्स, मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री, रेजिमेंट ऑफ आर्टिलरी, राइफल रेजिमेंट्स, मराठा लाइट इन्फैंट्री, जम्मू एंड कश्मीर लाइट इन्फैंट्री और कॉर्प्स ऑफ सिग्नल्स में कर्नल रैंक तक के अधिकारियों के लिए ऐसी बेल्ट अभी भी मान्य हैं।

