ग्वालियर में बनेगा देश का पहला टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन, 10 हजार युवाओं को मिलेगा रोजगार?
ग्वालियर। नए स्वर्णिम अध्याय की शुरुआत हुई है। देश का पहला टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन ग्वालियर में बनेगा। इसके लिए केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया व प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी में गुरुवार को दिल्ली के विज्ञान भवन में केंद्र सरकार के दूरसंचार मंत्रालय और मध्य प्रदेश औद्योगिक विकास निगम के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। केंद्र सरकार ने 500 करोड़ की शत-प्रतिशत वित्तीय सहायता स्वीकृत की है। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बताया कि भारत को दूरसंचार क्षेत्र में सेवा प्रदाता से उत्पादक बनने के लिए स्वदेशी औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र की आवश्यकता है। ग्वालियर में यह टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन लगभग 350 एकड़ क्षेत्र में प्लग-एंड-प्ले मॉडल पर विकसित किया जाएगा। परियोजना के प्रथम चरण के बुनियादी ढांचे के विकास के लिए केंद्र सरकार ने 500 करोड़ की शत-प्रतिशत वित्तीय सहायता स्वीकृत की है।
एक ही परिसर में संपूर्ण सुविधाएं
इस एकीकृत परिसर में मोबाइल फोन, नेटवर्क उपकरण, फाइबर ऑप्टिक्स, सेमीकंडक्टर, तथा 5जी और 6जी तकनीकों के अनुसंधान, डिजाइन, परीक्षण और उत्पादन की अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी। सिंधिया ने टीएमजेड के दीर्घकालिक लाभों का उल्लेख करते हुए बताया कि इसके माध्यम से ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में लगभग नौ हजार करोड़ रुपये तक का कुल निवेश आएगा, जिससे 10 हजार से अधिक युवाओं को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। प्रथम चरण में ही डिक्सन टेक्नोलॉजीज, एचएफसीएल और तेजस नेटवर्क जैसी देश की अग्रणी कंपनियों द्वारा लगभग दो हजार करोड़ रुपये का प्रारंभिक निवेश किया जा रहा है, जिससे चार हजार पांच सौ से अधिक उच्च-वेतन वाले रोजगार सृजित होंगे। इससे अंचल के युवाओं को अपने ही क्षेत्र में रोजगार के बेहतरीन अवसर प्राप्त होंगे।
केंद्र और राज्य की साझा भागीदारी वाली पहली परियोजना
परियोजना के सुचारू संचालन और क्रियान्वयन के लिए एक विशेष प्रयोजन वाहन (एसपीवी) का गठन किया जाएगा, जिसमें मध्य प्रदेश सरकार की 51 प्रतिशत और भारत सरकार के दूरसंचार विभाग की 49 प्रतिशत भागीदारी होगी। केंद्रीय मंत्री ने इसे सहकारिता का बेहतरीन उदाहरण बताते हुए विश्वास व्यक्त किया कि यह परियोजना भारत को दुनिया पर निर्भर रहने के बजाय, दुनिया को भारत पर निर्भर बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित होगी। ग्वालियर को देश की यह परियोजना देश के प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक्स एवं दूरसंचार विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करेगी। यह केंद्र व राज्य की साझा परियोजना है।

