अवैध अतिक्रमण को हटाने के लिए चलेगा बुलडोजर, HC का आदेश- 5 हफ्ते के भीतर हो एक्शन?
लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने कैसरबाग स्थित जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर और उसके आसपास फैले सभी अवैध अतिक्रमणों को हटाने के लिए बेहद सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने जिला प्रशासन और नगर निगम को स्पष्ट निर्देश दिया है कि परिसर के चारों तरफ से सभी प्रकार के अवैध कब्जे हर हाल में 5 सप्ताह के भीतर हटाए जाएं। जस्टिस राजेश सिंह चौहान और जस्टिस राजीव भारती की खंडपीठ ने कहा कि प्रशासन द्वारा अब तक की गई कार्रवाई अधूरी है। 7 अप्रैल 2026 के मूल आदेश पर पूरी तरह अमल किया जाना अनिवार्य है। कोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख 26 अक्टूबर नियत की है। हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि सभी अवैध कब्जाधारकों को नियमानुसार 10 दिनों का नोटिस दिया जाए। तय समय सीमा में यदि कब्जाधारक अपनी जगह का कोई वैध साक्ष्य या दस्तावेज पेश नहीं कर पाते हैं तो उनके ढांचों के खिलाफ तुरंत ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी को व्यक्तिगत नोटिस तामील नहीं कराया जा सकता है तो प्रमुख हिंदी और अंग्रेजी दैनिक समाचार पत्रों में सार्वजनिक इश्तिहार प्रकाशित कराया जाए, जिसके बाद जवाब के लिए 10 दिन का समय मिलेगा। अदालत की न्यायिक कार्यवाही में किसी तरह की बाधा न पहुंचे, इसके लिए बेंच ने नगर निगम व प्रशासन को रविवार और अवकाश के दिनों में भी डिमोलिशन ड्राइव चलाने की पूरी छूट दी है। हाईकोर्ट के कड़े निर्देशों के बाद लखनऊ नगर निगम और जिला प्रशासन ने करीब 150 अवैध निर्माणों को ढहाने का खाका तैयार कर लिया है, जिनमें सबसे बड़ी संख्या वकीलों के अवैध चैंबरों की है। नगर निगम जोन-1 के जोनल अधिकारी ओपी सिंह ने बताया कि पहले चरण में उन 50 के करीब चैंबरों और ढांचों को तोड़ा जाएगा, जिन पर पूर्व में ही लाल रंग से क्रॉस (मार्किंग) के निशान लगाए जा चुके थे लेकिन पिछली दो कार्रवाइयों में वे छूट गए थे। इसके अलावा नगर निगम की टीम जमीन की पूर्व में हो चुकी पैमाइश के आधार पर शेष 100 से अधिक अवैध निर्माणों को चिन्हित कर अंतिम मार्किंग कर रही है।
हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में 17 मई को 14 और 31 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के क्रम में 57 अवैध अतिक्रमण हटाए जा चुके थे। 17 मई को नाले पर बने चैंबरों को हटाने के दौरान वकीलों ने उग्र विरोध प्रदर्शन और पथराव किया था, जिसमें कई पुलिसकर्मी व अधिवक्ता चोटिल हुए थे। नगर निगम ने 8 सितंबर को तस्वीरों के साथ अनुपालन आख्या हाईकोर्ट में पेश की थी। नगर निगम प्रशासन के अनुसार, कोर्ट परिसर के बाहर नाले और आसपास से हटाए गए 71 अवैध ढांचों की खाली जमीन पर जाम की समस्या से निपटने के लिए आधुनिक स्ट्रीट पार्किंग बनाने का निर्णय लिया गया है। हाईकोर्ट ने पुलिस आयुक्त, डीएम और नगर आयुक्त को आपस में बेहतर समन्वय बनाकर नगर निगम की प्रवर्तन टीम को पर्याप्त पुलिस बल और संसाधन मुहैया कराने के निर्देश दिए हैं।

