₹13,017 की टिकट, सफर परेशानी का कारण? श्रीनाथ ट्रैवल एजेंसी प्राइवेट लिमिटेड को कानूनी नोटिस!
वाराणसी। वाराणसी से मुंबई तक की लंबी दूरी की बस यात्रा को लेकर एक महत्वपूर्ण उपभोक्ता विवाद सामने आया है। दो यात्रियों द्वारा श्रीनाथ ट्रैवल एजेंसी प्राइवेट लिमिटेड को सेवा में कथित कमी, यात्रियों की सुरक्षा के प्रति लापरवाही तथा मानसिक एवं शारीरिक कष्ट पहुंचाने के आरोपों के साथ कानूनी नोटिस भेजा गया है। कंपनी भारत के प्रमुख निजी बस ऑपरेटरों में से एक होने का दावा करती है और महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, उत्तर प्रदेश तथा मध्य प्रदेश सहित अनेक राज्यों में अपनी सेवाएं संचालित करती है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, PNR 407641278-462091 के अंतर्गत 5 सितंबर 2026 को वाराणसी से मुंबई की यात्रा के लिए दो यात्रियों ने टिकट बुक कराया था। टिकट के अनुसार कुल भुगतान राशि ₹13,017.90 थी। यात्रियों का आरोप है कि भुगतान के अनुरूप उन्हें सुरक्षित, आरामदायक एवं मानक स्तर की सेवा उपलब्ध नहीं कराई गई।
स्लीपर बर्थ की सुरक्षा पर प्रश्नचिह्न
कानूनी नोटिस में आरोप लगाया गया है कि स्लीपर बर्थ के भीतर नुकीली कीलें अथवा धातु के उभरे हुए हिस्से मौजूद थे, जिससे यात्रियों को चोट लगने का खतरा बना हुआ था। यात्रियों का कहना है कि लंबी दूरी की यात्रा में इस प्रकार की स्थिति किसी भी जिम्मेदार परिवहन सेवा के लिए गंभीर लापरवाही मानी जानी चाहिए।
शौचालय सुविधा एवं यात्रा प्रबंधन पर शिकायत
नोटिस के अनुसार यात्रा के दौरान यात्रियों को आवश्यक अंतराल पर शौचालय सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई तथा बस को पर्याप्त स्थानों पर नहीं रोका गया। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इससे विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिक यात्री को अत्यधिक शारीरिक असुविधा का सामना करना पड़ा। यात्रियों ने यह भी आरोप लगाया है कि पूरी यात्रा के दौरान उन्हें अपेक्षित आराम, सुविधा और समुचित प्रबंधन नहीं मिला, जबकि उन्होंने प्रीमियम श्रेणी की स्लीपर यात्रा के लिए पर्याप्त किराया अदा किया था।
₹1 लाख क्षतिपूर्ति की मांग
अधिवक्ता नोटिस में कंपनी से निम्न मांगें की गई हैं—
टिकट की पूरी राशि ₹13,017.90 वापस की जाए;
मानसिक पीड़ा, शारीरिक कष्ट एवं असुविधा के लिए ₹1,00,000 की क्षतिपूर्ति दी जाए;
अधिवक्ता शुल्क एवं मुकदमेबाजी खर्च का भुगतान किया जाए;
भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने हेतु सुधारात्मक कदम उठाने की लिखित जानकारी दी जाए।
उपभोक्ता अधिकारों का मामला
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी यात्री को टिकट बुकिंग के समय जिस स्तर की सुविधा का आश्वासन दिया गया हो, वह वास्तविक यात्रा में उपलब्ध न कराई जाए, तो मामला उपभोक्ता संरक्षण कानून के अंतर्गत “सेवा में कमी” (Deficiency in Service) के रूप में विचारणीय हो सकता है।
15 दिन का अंतिम अवसर
नोटिस में कंपनी को 15 दिनों के भीतर जवाब एवं समाधान प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया है। अन्यथा संबंधित उपभोक्ता आयोग एवं अन्य सक्षम न्यायिक मंचों के समक्ष विधिक कार्यवाही प्रारंभ किए जाने की चेतावनी दी गई है।
कंपनी का पक्ष अपेक्षित
इस रिपोर्ट के प्रकाशन तक श्रीनाथ ट्रैवल एजेंसी प्राइवेट लिमिटेड की ओर से उक्त आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं हो सकी। कंपनी का मुख्यालय अहमदाबाद में स्थित है तथा वह देश के विभिन्न राज्यों में बस संचालन सेवाएं प्रदान करती है।
.. कौशल विनोद पाठक

