पंचायत चुनाव को लेकर कार्यकाल बढ़ाने का प्रस्ताव, यूपी में टल सकते हैं पंचायत चुनाव!
लखनऊ, उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर बड़ी राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। संकेत मिल रहे हैं कि प्रदेश में पंचायत चुनाव तय समय पर नहीं हो पाएंगे। पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने मंगलवार को इस संबंध में बड़ा बयान देते हुए कहा कि विभाग की ओर से शासन को दो अहम प्रस्ताव भेजे गए हैं। इनमें पहला प्रस्ताव ग्राम प्रधानों, ब्लॉक प्रमुखों और जिला पंचायत अध्यक्षों का कार्यकाल बढ़ाने का है, जबकि दूसरा प्रस्ताव उनके स्थान पर प्रशासकों की तैनाती का है। अब सरकार जिस प्रस्ताव पर मुहर लगाएगी, उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। दूसरी ओर राज्य निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची प्रकाशन की तारीख पांचवीं बार बढ़ाकर 10 जून कर दी है। साथ ही प्रदेश में जातीय जनगणना की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। ऐसे में प्रशासनिक और संवैधानिक प्रक्रियाओं को देखते हुए विधानसभा चुनाव से पहले त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव कराना मुश्किल माना जा रहा है। पंचायत चुनाव से जुड़ा मामला फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है। ऐसे में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव का अंतिम फैसला अदालत के आदेश और सरकार की सहमति के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।
यूपी में ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 26 मई तक निर्धारित है। नियमानुसार कार्यकाल समाप्त होने के बाद पंचायतों के संचालन के लिए दो व्यवस्थाएं लागू हो सकती हैं। पहली व्यवस्था के तहत प्रशासक समिति को ग्राम पंचायत संचालन का अधिकार दिया जा सकता है, जिसमें ग्राम प्रधान और पंचायत सदस्य शामिल होकर प्रशासनिक कार्यों को आगे बढ़ाते हैं। दूसरी व्यवस्था में सीधे प्रशासक नियुक्त किए जा सकते हैं। हालांकि, सूत्रों के मुताबिक सरकार की प्राथमिकता प्रशासक समिति के जरिए मौजूदा प्रधानों, ब्लॉक प्रमुखों और जिला पंचायत अध्यक्षों के कार्यकाल को बढ़ाने की हो सकती है।

