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Monday, June 29, 2026

पुरवाई 2026 के आयोजक ओम प्रकाश ने कहा – “मैं जा रहा हूं”

पुरवाई 2026 के आयोजक ओम प्रकाश ने कहा – “मैं जा रहा हूं”
क्या यह एक युग का अंत है या नई शुरुआत?

मीरा रोड।  मुंबई के साहित्यिक एवं सांस्कृतिक जगत में उस समय हलचल मच गई जब पुरवाई 2026 के आयोजक ओम प्रकाश ने भावुक अंदाज में कहा – “मैं जा रहा हूं।” इस एक वाक्य ने कार्यक्रम से जुड़े साहित्यकारों, कलाकारों और संस्कृति प्रेमियों के बीच अनेक सवाल खड़े कर दिए। उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी से इस बयान के विस्तृत संदर्भ की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है, इसलिए इसके कारणों पर निश्चित निष्कर्ष निकालना अभी जल्दबाज़ी होगी।

यदि यह कथन आयोजन की जिम्मेदारियों से अलग होने का संकेत है, तो यह केवल किसी व्यक्ति का निर्णय नहीं, बल्कि उस सांस्कृतिक यात्रा का भी महत्वपूर्ण मोड़ है, जिसने वर्षों तक साहित्य, संगीत और कला के अनेक रचनाकारों को एक मंच पर जोड़ा। पुरवाई केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि रचनात्मक संवाद और सामाजिक सरोकारों का मंच रहा है। ऐसे में आयोजक के इस भावनात्मक वक्तव्य ने स्वाभाविक रूप से यह प्रश्न खड़ा कर दिया है कि क्या आने वाले वर्षों में पुरवाई का स्वरूप बदलेगा या नई टीम इसके मिशन को आगे बढ़ाएगी।

सांस्कृतिक आयोजनों की सबसे बड़ी पूंजी उनका उद्देश्य और उनसे जुड़ा विश्वास होता है। व्यक्ति बदल सकते हैं, लेकिन यदि संस्था अपने मूल विचार और मूल्यों को बनाए रखती है तो उसकी यात्रा निरंतर चलती रहती है। अब साहित्य और कला जगत की निगाहें इस बात पर हैं कि ओम प्रकाश के इस वक्तव्य का वास्तविक आशय क्या है और पुरवाई के भविष्य को लेकर आयोजकों की आधिकारिक घोषणा क्या होगी। जब तक स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आती, तब तक किसी भी प्रकार की अटकलों से बचना ही उचित होगा।

.. कौशल विनोद पाठक – विशेष संवाददाता

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