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Saturday, October 3, 2026

झोपड़पट्टीवासियों को नोटिस देने के मुद्दे पर प्रशासन से तत्काल पुनर्विचार की मांग मुंबई में गरीब एवं वर्षों से रह रहे नागरिकों के हितों की रक्षा पर जोर!

झोपड़पट्टीवासियों को नोटिस देने के मुद्दे पर प्रशासन से तत्काल पुनर्विचार की मांग
मुंबई में गरीब एवं वर्षों से रह रहे नागरिकों के हितों की रक्षा पर जोर!

मुंबई, 23 सितंबर 2026। मुंबई शहर के झोपड़पट्टी क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों को नोटिस दिए जाने के मुद्दे ने एक बार फिर झोपड़पट्टी पुनर्वसन और गरीब नागरिकों के अधिकारों को लेकर चर्चा तेज कर दी है। इस संबंध में मुंबई महानगरपालिका के सभागृह नेता गणेश खणकर ने महानगरपालिका आयुक्त श्रीमती अश्विनी भिडे को पत्र लिखकर प्रशासन से संवेदनशील एवं मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की मांग की है। 21 सितंबर 2026 को लिखे गए पत्र में गणेश खणकर ने कहा है कि झोपड़पट्टी क्षेत्रों में निर्धारित मानदंड के अंतर्गत आने वाली झोपड़ियों को नोटिस दिए जाने की सूचना से मुंबई में भय का वातावरण निर्माण हुआ है। पत्र में मुंबई की बड़ी आबादी झोपड़पट्टी क्षेत्रों में निवास करती होने का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि लंबे समय से मुंबई में रह रहे गरीब नागरिकों के हितों को ध्यान में रखकर प्रशासन को कार्रवाई करनी चाहिए।

SRA और पुनर्वसन योजनाओं का उल्लेख
पत्र में महाराष्ट्र शासन द्वारा SRA (Slum Rehabilitation Authority) के माध्यम से बड़े पैमाने पर झोपड़पट्टी पुनर्वसन परियोजनाओं पर काम किए जाने का उल्लेख है। साथ ही विभिन्न स्थानों पर क्लस्टर योजना तथा अन्य योजनाओं के माध्यम से पुनर्वसन प्रक्रिया आगे बढ़ाए जाने की बात कही गई है। पत्र के अनुसार, मुंबई को झोपड़पट्टी-मुक्त बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं; हालांकि इस प्रक्रिया में गरीब और वर्षों से वहां निवास कर रहे परिवारों को अनावश्यक परेशानी न हो, इसका ध्यान रखा जाना आवश्यक है।

नोटिसों पर तत्काल रोक की मांग
गणेश खणकर ने आयुक्त से अनुरोध किया है कि यदि झोपड़पट्टी क्षेत्र में नोटिस अथवा कार्रवाई के संबंध में कोई निर्देश जारी किए गए हों, तो उन्हें तत्काल स्थगित अथवा पुनर्विचार किया जाए। उन्होंने यह भी कहा है कि यदि किसी झोपड़पट्टी क्षेत्र में ऐसी संरचनाएं हैं जिनसे नागरिकों की जान को खतरा हो सकता है, तो वहां कार्रवाई करते समय भी उचित प्रक्रिया, सुरक्षा और वैकल्पिक व्यवस्था को ध्यान में रखा जाना चाहिए।

“गरीब मुंबईकरों को अनावश्यक परेशानी न हो”
पत्र का मुख्य संदेश यही है कि मुंबई के विकास और पुनर्वसन की प्रक्रिया के साथ-साथ उन गरीब परिवारों के हितों की भी रक्षा की जाए जो लंबे समय से शहर में रह रहे हैं। गणेश खणकर के पत्र ने झोपड़पट्टी पुनर्वसन, प्रशासनिक नोटिस और गरीब नागरिकों के आवासीय अधिकारों से जुड़े मुद्दे को फिर सार्वजनिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है। अब इस पत्र पर महानगरपालिका प्रशासन की ओर से क्या निर्णय लिया जाता है, इस पर संबंधित नागरिकों की नजर रहेगी।
.. कौशल विनोद पाठक – विशेष संवाददाता 

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