मनौना धाम से चोरी बच्चे का लखीमपुर कनेक्शन, डॉक्टर भी शामिल?
बरेली। बच्चा चोरी गिरोह में लखीमपुर का एक डाक्टर भी शामिल है। उसी ने लखीमपुर निवासी उत्तम से पांच लाख रुपये में बच्चे की डील की थी। यह कहानी तब खुली जब पुलिस ने उत्तम को पकड़ लिया। पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि वह पूर्व में भी इसी डाक्टर के माध्यम से दो-तीन बच्चों को बेच चुका था। पुलिस अब आरोपित डाक्टर की तलाश में लगी है। बताया जा रहा है कि डाक्टर अन्य लोगों को मोटी रकम लेकर उन्हें बच्चे सप्लाई करता था। पुलिस का कहना हैं कि यह नेटवर्क कोई छोटा नहीं बल्कि इसमें अभी कई बड़े लोगों के भी नाम खुलेंगे। पुलिस हर बिंदु पर प्रमुखता से जांच कर रही है। मनौना धाम से 24 मई को डेढ़ साल के मासूम ऋषभ का अपहरण किया गया था। उसके पिता पिछले रमन पिछले एक वर्ष से मनौना धाम में सफाई कर्मचारी का काम करते हैं। पुलिस ने छानबीन शुरू की तो बाइक सवार दोनों युवक उसे ले जाते दिखे। पुलिस और एसओजी प्रथम ने 48 घंटे में 200 से अधिक सीसीटीवी कैमरे, टावर डंप से दोनों आरोपितों की पहचान कर ली। लगातार पीछा कर मंगलवार रात पुलिस ने दोनों को अलीगंज रोड पर फुलवासा गांव के पास से मुठभेड़ में गिरफ्तार कर लिया। बच्चे को भी सकुशल बरामद कर उन्हें माता-पिता को सुपुर्द कर दिया। पूछताछ में आरोपितों ने अपना नाम शाहजहांपुर निवासी योगेश कन्नौजिया और दूसरे ने बदायूं के ककोड़ा निवासी पवन सिंह बताया। आरोपितों से पूछताछ से स्पष्ट हुआ कि वह बच्चा उन्होंने लखीमपुर खीरी निवासी उत्तम के कहने पर चोरी किया था क्योंकि उत्तम ने बच्चा चोरी के एवज में 60 हजार रुपये देने की बात कही थी। उत्तम ने कहा था कि वह बच्चा किसी को पूर्वांचल में बेचना है।
मगर जब उत्तम के पास बच्चे को लेकर गए तो उसने कहा कि उसने चार-पांच माह का बच्चा मांगा था। डेढ़ साल का नहीं चाहिए इसलिए उसने बच्चे को वापस कर दिया। इसके बाद वह उसे दिल्ली में किसी अन्य व्यक्ति को पांच लाख रुपये में बेचने जा रहे थे। पुलिस का कहना है कि डाक्टर के गिरफ्तार होने के बाद आगे की चेन का राजफाश होगा। पुलिस का कहना है कि यह गिरोह कोई बड़ा गिरोह लगता है। इसके सरगना तक पहुंचा जाएगा। पुलिस को आशंका है कि जिस तरह से यह नेटवर्क काम कर रहा है। उससे तो यही अनुमान है कि यह नेटवर्क सिर्फ उत्तर प्रदेश ही नहीं बल्कि देश के अन्य राज्यों में भी इसका नेटवर्क हो सकता है।

