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Tuesday, June 16, 2026

कानपुर किडनी रैकेट – ट्रांसप्लांट के वसूलते थे 50 से 70 लाख?

कानपुर किडनी रैकेट – ट्रांसप्लांट के वसूलते थे 50 से 70 लाख?

    कानपुर। किडनी खरीदने-बेचने और अवैध ढंग से ट्रांसप्लांट करने के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी जांच शुरू कर दी है। ईडी गिरोह में शामिल आरोपितों के आर्थिक स्रोतों के अलावा यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आरोपितों ने पैसा कहां खपाया है। केशवपुरम स्थित आहूजा अस्पताल में मुजफ्फरनगर की पारुल का 29 मार्च की रात किडनी ट्रांसप्लांट किया गया था। पारुल के लिए बिहार के बेगूसराय निवासी आयुष ने किडनी बेची थी। प्रकरण का राजफाश पुलिस ने 30 मार्च को किया था। अस्पताल के संचालक डॉ. प्रीति आहूजा, उनके पति डॉ. सुरजीत आहूजा, आरोही अस्पताल के संचालक राजेश, मेडलाइफ के संचालक रामप्रकाश, प्रिया अस्पताल के संचालक नरेन्द्र सिंह, दलाल शिवम अग्रवाल को जेल भेजा गया था। बाद में गाजियाबाद के ओटी मैनेजर राजेश, हापुड़ निवासी ओटी इंचार्ज कुलदीप सिंह राघव, बागपत निवासी परवेज सैफी, उसके बाद गाजियाबाद निवासी और खुद को डॉक्टर बताने वाले रोहित तिवारी, सैफुद्दीन और अखिलेश तिवारी को पकड़ा गया था। मुदस्सर अली सिद्दीकी ने कोर्ट में आत्मसमर्पण किया था। पुलिस अब तक 13 लोगों को जेल भेज चुकी है, जबकि चार अभी फरार हैं। यह भी सामने आया है कि गिरोह मेरठ से संचालित था और मेरठ निवासी डॉ. अफजाल व डॉ. वैभव इसे संचालित कर रहे थे।

    गौरतलब है कि एक किडनी ट्रांसप्लांट में गिरोह के पास 50 से 70 लाख रुपये की रकम वसूलते थे। ऐसी संभावना है कि गिरोह ने दर्जनों किडनी ट्रांसप्लांट कराई हैं। यह रकम करोड़ों में है। इसे देखते हुए ही ईडी सक्रिय हुई है। आरोपितों द्वारा संपत्तियों की खरीद फरोख्त के अलावा ईडी गिरोह की आर्थिक चेन खंगालेगी। डीसीपी क्राइम श्रवण कुमार सिंह ने बताया कि पुलिस अब गिरोह के राजदार डॉ. अफजल, डॉ. वैभव और अनुराग उर्फ अमित व प्रयागराज निवासी नवीन पांडेय की तलाश में जुटी है।

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