35.4 C
Uttar Pradesh
Monday, June 22, 2026

निंबालकर हत्याकांड – आरोपितों को बरी करने के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देगी सीबीआइ?

निंबालकर हत्याकांड – आरोपितों को बरी करने के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देगी सीबीआइ?

मुंबई। महाराष्ट्र के कांग्रेस नेता पवनराजे निंबालकर और उनके ड्राइवर समद काजी की 20 साल पुरानी हत्या के मामले में पूर्व गृह मंत्री पद्मसिंह पाटिल और सात अन्य आरोपितों को बरी किए जाने के फैसले को सीबीआइ अब बांबे हाईकोर्ट में चुनौती देगी। एक विशेष सीबीआइ अदालत ने शनिवार को यह कहते हुए सभी आरोपितों को बरी कर दिया कि सरकारी गवाह बने एक आरोपित की गवाही से घटनाओं की कड़ियां साबित नहीं होती हैं। पवनराजे निंबालकर (42) और काजी की तीन जून 2006 को रायगढ़ जिले के कलंबोली के पास गोली मारकर हत्या कर दीगई थी। इस मामले की जांच शुरू में रायगढ़ पुलिस द्वारा की जा रही थी। बाद में जांच राज्य सीआईडी और फिर सीबीआई को सौंप दी गई। 20 साल पुराने मामले में फैसला सुनाते हुए विशेष सीबीआइ अदालत की अध्यक्षता करने वाले अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एस.आर. नवंदर ने कहा कि अभियोजन पक्ष साजिश को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा है।

सभी आरोपितों को बरी करते हुए अदालत ने टिप्पणी की कि घटनाक्रम की कोई पूरी कड़ी साबित नहीं हो सकी, ना ही कथित साजिश को साबित करने के लिए कोई ठोस सबूत पेश किए गए। अदालत ने यह भी पाया कि गवाहों के बयान असंगत थे और महत्वपूर्ण वैज्ञानिक और इलेक्ट्रानिक साक्ष्य या तो अनुपलब्ध थे या अपर्याप्त रूप से प्रस्तुत किए गए थे। सीबीआइ ने इस मामले में नौ लोगों पर आरोप लगाए थे। इनमें से एक पारसमल जैन, बाद में सरकारी गवाह बन गया। लंबे समय तक चले इस मुकदमे के दौरान सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे सहित 128 गवाहों से पूछताछ की गई। पाटिल के बरी होने से बन सकते हैं नए राजनीतिक समीकरण इस फैसले के दूरगामी परिणाम अदालती दायरे से परे महाराष्ट्र के बदलते राजनीतिक परिदृश्य पर भी पड़ सकते हैं। यह फैसला ऐसे समय में महत्वपूर्ण हो जाता है जब पवनराजे के बेटे, धाराशिव से सांसद ओमराजे निंबालकर शिवसेना (यूबीटी) को छोड़कर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने की कतार में हैं।

शरद पवार के करीबी रहे 86 वर्षीय पद्मसिंह पाटिल, महाराष्ट्र की वर्तमान उपमुख्यमंत्री और राकांपा अध्यक्ष सुनेत्रा पवार के सौतेले बड़े भाई हैं। वे और पवनराजे चचेरे भाई थे, लेकिन उनके रिश्ते में समय के साथ तगड़ी राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता का जन्म हुआ, जिसने वर्षों तक क्षेत्रीय राजनीति को प्रभावित किए रखा। सभी आरोपितों के बरी होने के साथ ही, यह फैसला महाराष्ट्र की सहकारी राजनीति, पारिवारिक प्रतिद्वंद्विता और क्षेत्रीय सत्ता समीकरणों से दो दशकों से जुड़े एक कानूनी अध्याय का अंत करता है। अब देखना यह होगा कि क्या इसका असर शिवसेना बनाम शिवसेना की चल रही लड़ाई के अगले चरण पर भी पड़ेगा, क्योंकि यदि ओमराजे निंबालकर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना में प्रवेश करते हैं, तो वह उसी महायुति का हिस्सा बनेंगे, जिसमें सुनेत्रा पवार भी दूसरी उपमुख्यमंत्री हैं जोकि आज बरी हुए पद्मसिंह पाटिल की सौतेली बहन हैं।

ताजा खबर
सम्बंधित खबर

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें