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Sunday, October 25, 2026

माटी के महक -विनोद पाठक द्वारा स्वरचित भोजपुरी ..

माटी के महक -विनोद पाठक द्वारा स्वरचित भोजपुरी .. 

माटी के महक बा, गंगा के धार बा,
भोजपुरी बोली में अपनापन अपार बा।
मीठ-मीठ बोलिया जब कान में पड़ेला,
सूखल मनवा भी फूल बनके खिलेला।
अरे ए माई, ई माटी महान बा,
हर धड़कन में बसल हिंदुस्तान बा।
भोजपुरी के मिठास दिलवा छू जाला,
परदेस में रहके भी गाँव याद आ जाला।
पुरवा के पवन जब अंगना में आवेला,
बचपन के हर एगो कहानी सुनावेला।
आम के बगइचा, पीपर के छाँव,
आजुओ दिल में बसल बा आपन गाँव।
छठी मइया के घाट, दीप के उजियार,
सूरुज देव के अरघ से चमके संसार।
माई के ममता, बाबूजी के दुलार,
ई सभे से सजल बा भोजपुरिया परिवार।
ना जात के दीवार, ना भाषा के भेद,
प्रेम से जुड़ल रहे भारत के हर खेद।
हिंदी होखे चाहे भोजपुरी के बानी,
सब भाषा मिलके लिखे देश के कहानी।
भोजपुरी खाली बोली ना, पहचान हऽ,
दिल से निकले वाला ई मुस्कान हऽ।
जहाँ-जहाँ भोजपुरी के आवाज गूँजेला,
ओहिजा भारत माँ के प्यार बरसेला।

.. विनोद पाठक स्वरचित

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