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Saturday, August 29, 2026

सफल रहा ‘ज़मीं से आसमां तक’ का लोकार्पण समारोह डॉ. मीना राजपूत की पुस्तक ज्ञान और जानकारी का भंडार : डॉ. सुधाकर मिश्र

 सफल रहा ‘ज़मीं से आसमां तक’ का लोकार्पण समारोह
डॉ. मीना राजपूत की पुस्तक ज्ञान और जानकारी का भंडार : डॉ. सुधाकर मिश्र

मुंबई। डॉ. मीना राजपूत की सद्य प्रकाशित पुस्तक ‘ज़मीं से आसमां तक’ का शानदार लोकार्पण समारोह वरिष्ठ साहित्यकार एवं गीतकार डाॅ. सुधाकर मिश्र की अध्यक्षता में मीरा रोड स्थित विरुंगला केंद्र में सफलता पूर्वक संपन्न हुआ। यह आयोजन ‘साहित्य गंगा’ और ‘स्वर संगम फाउंडेशन’ ने संयुक्त रूप से आयोजित किया। इस अवसर पर अपने अध्यक्षीय भाषण में सुधाकर मिश्र ने मीना राजपूत की पुस्तक को ज्ञान और जानकारी का भंडार कहा। उन्होंने कहा कि विषय वैविध्य की दृष्टि से एक अद्भुत पुस्तक होने के साथ सभी विषय के साथ न्याय भी किया गया है। डॉ मिश्रा ने कहा कि निबंध लेखन के क्षेत्र में महिला लेखिकाओं महादेवी वर्मा, शिवानी, मन्नू भंडारी आदि ने अच्छे निबंध लिखे हैं। गर्व की बात यह है कि मेरी शिष्या मीना राजपूत का नाम भी अब इसी श्रेणी में शामिल हो गया है। महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी के पूर्व कार्याध्यक्ष डाॅ. शीतला प्रसाद दुबे इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। उन्होंने पुस्तक पर अपनी बात रखते हुए कहा कि हमारे देश के बारे में कहा जाता है कि हमारा देश विविधता में एकता का देश है। यह पुस्तक भी विषय की दृष्टि से उसी विविधता को एक पुस्तक में संजोने का प्रयास है। पर्व, भाषा, अनुवाद, हिंदी आदि विषयों पर बात की गई है। कुछ संस्मरणाात्मक लेख भी इसमें शामिल हैं। विषयों के बिखराव के बावजूद, पुस्तक में पाठक को बांध कर रखने की क्षमता है। साहित्यिक पत्रिका चिंतन दिशा के संपादक और कई पुस्तकों के रचयिता हृदयेश मयंक ने कहा कि विविधता से भरी कई पुस्तकों की सामग्री समेटे 616 पृष्ठों की मोटी पुस्तक गत वर्षों में देखने को नहीं मिली थी। डाॅ. मीना राजपूत की मेहनत और अनेक वर्षों का लेखन इसमें समाहित है। कार्यक्रम का सफल संचालन व संयोजन वरिष्ठ पत्रकार राकेश दुबे ने किया।

डाॅ. सुधाकर मिश्र को सुनना और उनका सानिध्य प्राप्त करना हिंदी साहित्य प्रेमियों के लिए हमेशा ही गौरव की बात रही है। इस कार्यक्रम की एक और उपलब्धि उनके काॅलेज के दिनों के अनेक शिष्य डाॅ. मीना राजपूत को बधाई देने के लिए उपस्थित रहे। कुछ तो एक दूसरे से दशकों बाद मिल रहे थे। आरंभ में डाॅ. मीना राजपूत अपने लेखन व अपनी गाइड और मार्गदर्शक डॉ माधुरी छेड़ा को याद कर भावुक भी होती रहीं। कुल मिलाकर एक स्वस्थ वैचारिक और साहित्यिक माहौल बना रहा। इस अवसर पर गुलाब यादव, वरिष्ठ पत्रकार निरंजन परिहार, के सी कॉलेज के हिंदी विभागाध्यक्ष अजीत राय, मंजू सिंह, अंजू बिष्ट, आकाशवाणी की उद्घोषक साक्षी त्रिपाठी, तेजधर पाठक, आर ए सिंह यादव, आर डी तिवारी, सुरेखा शर्मा, विजय राजपूत समेत बड़ी संख्या में वरिष्ठ नागरिक, पत्रकार और साहित्य प्रेमी उपस्थित थे। राकेश दुबे ने सबका आभार व्यक्त किया।

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