विश्वविख्यात श्री सिद्धिविनायक मंदिर न्यास के लोकप्रिय कोषाध्यक्ष आचार्य पवन त्रिपाठी
सेवा, सादगी और समर्पण की प्रेरक मिसाल ..
मुंबई। मुंबई के प्रभादेवी स्थित विश्वविख्यात श्री सिद्धिविनायक गणपति मंदिर केवल आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की अटूट श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक है। महाराष्ट्र शासन द्वारा नियंत्रित इस प्रतिष्ठित मंदिर न्यास का संचालन पारदर्शिता, अनुशासन और सेवा-भाव के साथ किया जाता है। इसी व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में मंदिर न्यास के लोकप्रिय कोषाध्यक्ष आचार्य पवन त्रिपाठी का योगदान अत्यंत उल्लेखनीय माना जाता है। महाराष्ट्र की सांस्कृतिक परंपरा और हिंदी भाषी समाज के बीच सेतु का कार्य करने वाले आचार्य पवन त्रिपाठी अपनी विनम्रता, सरल स्वभाव, ईमानदारी और कर्मनिष्ठा के कारण श्रद्धालुओं के बीच विशेष सम्मान प्राप्त कर चुके हैं। मंदिर में आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु के प्रति उनका व्यवहार आत्मीयता और सेवा-भाव से परिपूर्ण रहता है। यही कारण है कि वे केवल एक प्रशासक नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं के विश्वास के प्रतीक बन चुके हैं।
श्री सिद्धिविनायक मंदिर प्रतिदिन हजारों और विशेष अवसरों पर लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बनता है। ऐसे विशाल धार्मिक संस्थान के वित्तीय और प्रशासनिक दायित्वों का निर्वहन अत्यंत जिम्मेदारी का कार्य है। आचार्य पवन त्रिपाठी ने अपने कार्यकाल में ईमानदारी, पारदर्शिता और उत्तरदायित्व का ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया है, जिसकी प्रशंसा समाज के विभिन्न वर्गों द्वारा की जाती है। उनकी कार्यशैली का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि वे पद की गरिमा के साथ-साथ मानवीय संवेदनाओं को भी सर्वोच्च स्थान देते हैं। मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधाओं, धार्मिक परंपराओं के संरक्षण तथा न्यास की प्रतिष्ठा को निरंतर ऊँचाइयों तक पहुँचाने के लिए वे समर्पित भाव से कार्य करते रहे हैं।
धार्मिक और सामाजिक क्षेत्रों से जुड़े अनेक लोगों का मानना है कि आचार्य पवन त्रिपाठी जैसे कर्मयोगी व्यक्तित्व सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी और सेवा की प्रेरणा देते हैं। उनकी सादगी, सहजता और सकारात्मक सोच उन्हें जनप्रिय बनाती है। यही कारण है कि महाराष्ट्र सहित देश के विभिन्न राज्यों से आने वाले श्रद्धालु भी उनके व्यवहार और कार्यशैली की सराहना करते हैं। प्रभादेवी स्थित श्री सिद्धिविनायक मंदिर आज जिस अनुशासित और श्रद्धामय वातावरण के लिए जाना जाता है, उसमें न्यास के सभी पदाधिकारियों और कर्मचारियों के साथ-साथ आचार्य पवन त्रिपाठी की सक्रिय भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। उनका जीवन संदेश देता है कि सच्ची सेवा वही है, जिसमें पद से अधिक महत्व कर्तव्य, ईमानदारी और मानवता का हो।
.. कौशल विनोद पाठक – विशेष संवाददाता

