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Wednesday, July 15, 2026

NBEMS परीक्षा में गंभीर अनियमितताओं का आरोप?

NBEMS परीक्षा में गंभीर अनियमितताओं का आरोप?
तकनीकी खामी और मनमानी सत्यापन प्रक्रिया से मेडिकल अभ्यर्थी का भविष्य दांव पर, हाईकोर्ट में जाने की चेतावनी

मुंबई, 7 जुलाई। राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड (NBEMS) द्वारा आयोजित मेडिकल प्रवेश परीक्षा को लेकर एक गंभीर विवाद सामने आया है। राजस्थान के सीकर निवासी मेडिकल अभ्यर्थी आफताब रियाजुद्दीन खान ने परीक्षा के दौरान हुई कथित प्रशासनिक अनियमितताओं, तकनीकी खामी तथा परिणाम में त्रुटि का आरोप लगाते हुए NBEMS के कार्यकारी निदेशक को अपने अधिवक्ता एडवोकेट वी. एल. पाठक के माध्यम से विस्तृत कानूनी शिकायत भेजी है। शिकायत में दावा किया गया है कि परीक्षा केंद्र पर दस्तावेज़ सत्यापन के दौरान अभ्यर्थी के साथ मनमाना और भेदभावपूर्ण व्यवहार किया गया। आरोप है कि सत्यापन कर्मियों ने उनके प्रवेश पत्र में कथित विसंगति बताकर होटल में रखा पासपोर्ट लाने के लिए कहा, जबकि होटल परीक्षा केंद्र से लगभग दो किलोमीटर दूर था। परीक्षा शुरू होने से ठीक पहले इस भागदौड़ के कारण अभ्यर्थी मानसिक तनाव में आ गया। शिकायत में यह भी कहा गया है कि ठीक पीछे खड़े एक अन्य अभ्यर्थी को समान दस्तावेज़ होने के बावजूद बिना किसी आपत्ति के प्रवेश दे दिया गया।

मामले का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू परीक्षा के दौरान सामने आई तकनीकी समस्या है। शिकायत के अनुसार प्रसूति एवं स्त्री रोग (OBG) विषय का एक वीडियो आधारित प्रश्न अभ्यर्थी के कंप्यूटर स्क्रीन पर चला ही नहीं। अगले दिन अन्य परीक्षार्थियों से बातचीत के बाद उसे पता चला कि वही वीडियो उनके सिस्टम पर सामान्य रूप से प्रदर्शित हुआ था। इससे संबंधित प्रश्न का उत्तर देने का अवसर उसे नहीं मिल सका और संभावित अंक का नुकसान हुआ। इसी के साथ परिणाम घोषित होने पर अभ्यर्थी को केवल 148 अंक प्राप्त होने की जानकारी मिली, जिसे उसने अपनी वास्तविक परीक्षा के प्रदर्शन से पूरी तरह असंगत बताया है। शिकायत में आशंका व्यक्त की गई है कि सॉफ्टवेयर, सर्वर, मूल्यांकन अथवा स्कोर गणना में किसी प्रकार की तकनीकी त्रुटि के कारण अंतिम परिणाम प्रभावित हुआ हो सकता है। अधिवक्ता वी. एल. पाठक द्वारा भेजी गई शिकायत में NBEMS से स्वतंत्र तकनीकी एवं फॉरेंसिक जांच कराने, परीक्षा लॉग, सर्वर रिकॉर्ड, रिस्पॉन्स शीट और मूल्यांकन प्रक्रिया की समीक्षा करने, वीडियो आधारित प्रश्न की तकनीकी विफलता की जांच करने तथा दस्तावेज़ सत्यापन में कथित मनमानी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की गई है। साथ ही अभ्यर्थी का परिणाम संशोधित कर उसे विधिसम्मत अंक प्रदान करने और काउंसलिंग एवं प्रवेश प्रक्रिया में किसी प्रकार का नुकसान न होने देने की भी मांग की गई है।

शिकायत में NBEMS को सात दिनों के भीतर विस्तृत एवं कारणयुक्त उत्तर देने का आग्रह किया गया है। ऐसा न होने पर संबंधित अभ्यर्थी ने संविधान के अनुच्छेद 226 के अंतर्गत उच्च न्यायालय सहित सक्षम न्यायिक मंचों का दरवाजा खटखटाने की चेतावनी दी है। इसमें परिणाम संशोधन, काउंसलिंग अधिकारों की सुरक्षा, मानसिक पीड़ा एवं शैक्षणिक अवसरों की क्षति के लिए क्षतिपूर्ति तथा अन्य विधिक राहतें मांगने की बात कही गई है। यह मामला केवल एक अभ्यर्थी की व्यक्तिगत शिकायत तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में तकनीकी विश्वसनीयता, पारदर्शिता और समान व्यवहार जैसे महत्वपूर्ण प्रश्न भी खड़े करता है। यदि शिकायत में लगाए गए आरोप जांच में सही पाए जाते हैं, तो यह परीक्षा संचालन प्रणाली की जवाबदेही और तकनीकी गुणवत्ता पर व्यापक बहस को जन्म दे सकता है।

.. विशेष रिपोर्ट : कौशल विनोद पाठक

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