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Tuesday, September 1, 2026

आईएएस दिव्या मित्तल का 13 साल की प्रशासनिक यात्रा को विराम?

आईएएस दिव्या मित्तल का 13 साल की प्रशासनिक यात्रा को विराम?
लंदन की नौकरी छोड़ देशसेवा के लिए लौटीं, मिर्जापुर में पानी पहुंचाने से लेकर जनविश्वास तक छोड़ी अमिट छाप ..

लखनऊ/मिर्जापुर। उत्तर प्रदेश कैडर की 2013 बैच की चर्चित आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने करीब 13 वर्षों की प्रशासनिक सेवा के बाद स्वेच्छा से भारतीय प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट के माध्यम से अपने निर्णय की जानकारी दी। उनके इस्तीफे की खबर सामने आते ही प्रशासनिक और सामाजिक क्षेत्रों में इसकी व्यापक चर्चा शुरू हो गई। दिव्या मित्तल की कहानी केवल एक आईएएस अधिकारी की नौकरी छोड़ने की कहानी नहीं, बल्कि एक ऐसे सपने की कहानी है, जिसमें विदेश की आकर्षक नौकरी छोड़कर देश की मिट्टी का कर्ज चुकाने का संकल्प था। IIT दिल्ली और IIM बैंगलोर से शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने लंदन में नौकरी की, लेकिन विदेश में सफल करियर के बावजूद उन्हें अपने देश से दूर रहने का एहसास खटकता रहा। अंततः उन्होंने भारत लौटकर सिविल सेवा का रास्ता चुना।

‘सब कुछ’ पाने के बाद भी कुछ अधूरा था
अपने भावुक संदेश में दिव्या मित्तल ने लिखा कि उन्हें महसूस हुआ कि उनकी शिक्षा, आत्मविश्वास और दुनिया में सिर उठाकर चलने की ताकत इस देश की मिट्टी का ऋण है। इसी ऋण को चुकाने की इच्छा उन्हें वापस भारत लेकर आई।
प्रशासनिक सेवा में रहते हुए उन्होंने उत्तर प्रदेश के विभिन्न महत्वपूर्ण दायित्व संभाले। वे मिर्जापुर, देवरिया और संत कबीर नगर में जिलाधिकारी सहित कई महत्वपूर्ण पदों पर रहीं तथा राजस्व विभाग में विशेष सचिव के पद पर भी कार्य किया।

मिर्जापुर की वह ‘पानी वाली कहानी’
दिव्या मित्तल के कार्यकाल की सबसे चर्चित उपलब्धियों में मिर्जापुर के दुर्गम क्षेत्र में ग्रामीणों तक पेयजल पहुंचाने का प्रयास रहा। लहुरिया दह क्षेत्र में लंबे समय से पानी की समस्या झेल रहे ग्रामीणों के लिए पाइपलाइन के माध्यम से पानी पहुंचाना उनके कार्यकाल की मानवीय उपलब्धियों में गिना जाता है। अपने विदाई संदेश में उन्होंने इसी अनुभव को याद करते हुए एक वृद्ध महिला के आशीर्वाद का उल्लेख किया – एक ऐसा क्षण, जिसे उन्होंने पद और प्रतिष्ठा से कहीं अधिक मूल्यवान बताया।

‘हर सरकारी फाइल के पीछे एक इंसान है’
दिव्या मित्तल के संदेश की सबसे महत्वपूर्ण बात प्रशासन को लेकर उनकी मानवीय सोच रही। उन्होंने कहा कि सरकारी फाइलों के पीछे केवल कागज नहीं, बल्कि एक व्यक्ति और उसकी जिंदगी होती है। उनके अनुसार उस व्यक्ति की गरिमा बनाए रखना ही न्याय की वास्तविक भावना है।उन्होंने देवरिया से ‘सही के साथ खड़े रहने’ और मिर्जापुर से ‘असंभव को केवल एक राय मानने’ की सीख मिलने की बात कही। साथ ही उन्होंने कहा कि जनता के विश्वास ने उन्हें कठिन परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने की शक्ति दी।

पद गया, सपना नहीं
दिव्या मित्तल ने अपने इस्तीफे को किसी शिकायत या विवाद से नहीं जोड़ा है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने अपने निर्णय का कोई विशिष्ट कारण सार्वजनिक रूप से नहीं बताया है। उनका संदेश इस बात पर केंद्रित रहा कि प्रशासनिक पद समाप्त हो सकता है, लेकिन देश और समाज के लिए देखा गया सपना समाप्त नहीं होता। उनकी 13 वर्षों की यात्रा यह सवाल भी छोड़ जाती है कि क्या सार्वजनिक सेवा का अर्थ केवल पद पर बने रहना है? दिव्या मित्तल की कहानी इसका एक अलग उत्तर देती है – सेवा का भाव पद से बड़ा होता है।

कौशल विनोद पाठक की टिप्पणी
दिव्या मित्तल का इस्तीफा एक अधिकारी के करियर का अंत जरूर है, लेकिन उनकी कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो सफलता को केवल ऊंचे वेतन, बड़े पद या विदेश की नौकरी से नहीं मापते। IIT और IIM की प्रतिष्ठित शिक्षा, लंदन का करियर और फिर भारतीय प्रशासनिक सेवा – यह यात्रा बताती है कि जब प्रतिभा के साथ राष्ट्रसेवा का संकल्प जुड़ता है, तो प्रशासनिक पद जनविश्वास का माध्यम बन सकता है। दिव्या मित्तल ने जाते-जाते शायद यही संदेश दिया है
“पद छूट सकता है, लेकिन लोगों के लिए देखा गया सपना नहीं छूटता।”

.. कौशल विनोद पाठक

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