बम-बम बोल रहा है काशी, हर-हर महादेव से गूंजा बाबा विश्वनाथ का धाम ..
सावन के पहले सोमवार पर शिवमय हुई काशी, आस्था के महासागर में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब
वाराणसी। “बम-बम बोल रहा है काशी, हर-हर महादेव…!” सावन की फुहार, गंगा की पवित्र धारा और बाबा विश्वनाथ के जयघोष के बीच सोमवार को काशी की सुबह कुछ अलग ही रंग में दिखाई दी। सावन के पहले सोमवार पर बाबा श्री काशी विश्वनाथ के दर्शन और जलाभिषेक के लिए श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर रहा। सावन 2026 की शुरुआत 30 जुलाई से हुई है और इसका समापन 28 अगस्त को रक्षाबंधन के दिन होगा। इस वर्ष सावन में चार सोमवार पड़ रहे हैं। पहले सोमवार यानी 3 अगस्त को बाबा विश्वनाथ का विशेष ‘शंकर स्वरूप’ श्रृंगार निर्धारित है। आगामी सोमवारों पर क्रमशः गौरी-शंकर, अर्धनारीश्वर और रुद्राक्ष श्रृंगार की योजना है।
गंगा से विश्वनाथ तक आस्था की अविरल धारा
भोर से ही काशी के घाटों, गलियों और बाबा विश्वनाथ धाम की ओर जाने वाले रास्तों पर शिवभक्तों की चहल-पहल दिखाई दी। हाथों में गंगाजल, माथे पर त्रिपुंड और जुबान पर “हर-हर महादेव” तथा “बोल बम” का उद्घोष—मानो पूरी काशी स्वयं शिव की आराधना में लीन हो गई हो। काशी की पहचान केवल एक प्राचीन नगरी के रूप में नहीं, बल्कि भगवान शिव की नगरी के रूप में करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ी हुई है। सावन आते ही यहां की आध्यात्मिक अनुभूति और प्रगाढ़ हो जाती है। कांवड़ियों और शिवभक्तों के जयघोष से वातावरण भक्तिमय हो उठता है।
श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा पर विशेष जोर
सावन में भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने पहले से ही सुरक्षा, पेयजल, चिकित्सा सहायता, पार्किंग, स्वच्छता, सीसीटीवी निगरानी और भीड़ प्रबंधन जैसी व्यवस्थाओं की समीक्षा की थी। श्रद्धालुओं को समान रूप से दर्शन का अवसर उपलब्ध कराने और भीड़ को नियंत्रित रखने के उद्देश्य से सावन के दौरान VIP एवं प्रोटोकॉल दर्शन स्थगित रखने का निर्णय भी लिया गया है। मंदिर प्रशासन को विशेष रूप से सोमवार के दिनों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है।
‘बम-बम बोल रहा है काशी’—सिर्फ उद्घोष नहीं, काशी की आत्मा
काशी में सावन का अर्थ केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं है। यह आस्था, संस्कृति, परंपरा और सनातन चेतना का ऐसा संगम है, जिसमें देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले श्रद्धालु एक ही रंग – शिव के रंग – में रंग जाते हैं।
गंगा की लहरें हों या विश्वनाथ की गलियां, मंदिरों की घंटियां हों या भक्तों के जयकारे – हर ओर एक ही स्वर सुनाई देता है ..
“हर-हर महादेव! बोल बम! बम-बम बोल रहा है काशी!” सावन के पहले सोमवार ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि सदियां बदल सकती हैं, काशी का स्वरूप बदल सकता है, लेकिन बाबा विश्वनाथ के प्रति भक्तों की आस्था की धारा अनवरत बहती रहेगी।
काशी केवल एक शहर नहीं—एक अनुभूति है। काशी केवल एक तीर्थ नहीं—शिव में समर्पण का नाम है। और जब सावन आता है, तो सचमुच – “बम-बम बोल रहा है काशी!”
.. कौशल विनोद पाठक – विशेष संवाददाता / विशेष रिपोर्ट

