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Monday, September 14, 2026

मेडिकल साक्ष्य नहीं – हाई कोर्ट। गैंगरेप के तीन आरोपियों को 43 साल बाद किया बरी ..

 मेडिकल साक्ष्य नहीं – हाई कोर्ट। गैंगरेप के तीन आरोपियों को 43 साल बाद किया बरी ..

    प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मथुरा में 1983 के सामूहिक दुष्कर्म मामले में तीन अभियुक्तों को बरी कर दिया है। न्यायमूर्ति अवनीश सक्सेना की एकल पीठ ने संदेह का लाभ दिया। कोर्ट ने पाया कि एफआइआर दर्ज करने में बिना किसी वजह के देरी हुई और मामले की पुष्टि करने वाले मेडिकल साक्ष्य की पूरी तरह कमी है। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों से यह भरोसा नहीं होता कि अपीलार्थियों ने दुष्कर्म किया। अगर सात महीने की गर्भवती महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया होता तो इससे गंभीर मेडिकल इमरजेंसी की संभावना थी, लेकिन मेडिकल रिकार्ड में ऐसा कुछ नहीं है। मथुरा के एडिशनल सेशन जज ने मई 1984 में हेतराम, शंकर और भूदत को आइपीसी की धारा 376 के तहत दोषी ठहराते हुए था सात साल की सजा सुनाई थी। वादी मुकदमा ने कथित घटना के पांच दिन बाद यह एफआइआर दर्ज कराई थी कि उसकी सात महीने की गर्भवती पत्नी से चार लोगों ने चाकू की नोक पर दुष्कर्म किया।

    पीठ ने सुप्रीम कोर्ट के लल्लीराम बनाम मध्य प्रदेश राज्य मामले में दिए गए फैसले का हवाला देते हुए कहा कि हालांकि दुष्कर्म साबित करने के लिए शारीरिक चोट का होना अनिवार्य नहीं है, लेकिन जब पीड़िता की गवाही में विश्वसनीयता की कमी होती है, तो चोट का न होना अहम पहलू बन जाता है।

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