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Tuesday, May 12, 2026

शिक्षा और पुनर्वास पर विशेष ध्यान, उत्तर प्रदेश में बाल श्रमिक विद्या योजना का विस्तार..

शिक्षा और पुनर्वास पर विशेष ध्यान, उत्तर प्रदेश में बाल श्रमिक विद्या योजना का विस्तार..

   लखनऊ। प्रदेश में अभी भी करीब 12 से 15 लाख बाल श्रमिक होने का अनुमान है। इसे देखते हुए श्रम विभाग बाल श्रम के खिलाफ अभियान को और तेज करने की तैयारी कर रहा है। अब केवल बच्चों को काम से छुड़ाने पर ही नहीं, बल्कि उनके पुनर्वास और पढ़ाई पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसी उद्देश्य से बाल श्रमिक विद्या योजना का विस्तार किया जा रहा है, ताकि अधिक से अधिक बच्चों को मजदूरी से निकालकर स्कूलों में दाखिला दिलाया जा सके। योजना के तहत स्कूल में प्रवेश लेने वाले बच्चों को हर महीने एक हजार से 1200 रुपये तक की आर्थिक सहायता दी जा रही है। हालांकि योजना से जुड़े कई बच्चों की स्कूल में 70 प्रतिशत उपस्थिति नहीं होने के कारण उन्हें इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में अब बच्चों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित कराने पर विशेष जोर दिया जाएगा। बाल श्रम रोकने के लिए आपरेशन मुक्ति अभियान के तहत रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, होटल, ढाबों और अन्य संवेदनशील स्थानों पर विशेष रेस्क्यू अभियान चलाया जाएगा। खासतौर पर कानपुर और देवीपाटन मंडल में इस अभियान को और तेज करने की तैयारी है।

   विभाग का फोकस केवल बच्चों को काम से मुक्त कराने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उन्हें शिक्षा, पुनर्वास और सरकारी योजनाओं से जोड़ने पर भी रहेगा। इसके लिए बाल श्रमिकों के परिवारों को भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड की योजनाओं का लाभ दिलाने की तैयारी है, ताकि परिवार की आय बढ़ सके और बच्चों को दोबारा मजदूरी न करनी पड़े, इसके अलावा श्रम विभाग उन 15 जिलों के गांवों की पहचान और जीआइएस टैगिंग कराने पर भी विचार कर रहा है, जहां सबसे अधिक बच्चे मजदूरी करने जाते हैं। इससे निगरानी और कार्रवाई को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।

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