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Saturday, August 8, 2026

हिंदी साहित्य जगत के प्रख्यात आलोचक डॉ. चंद्रकांत बांदिवडेकर के निधन से शोक की लहर ..

हिंदी साहित्य जगत के प्रख्यात आलोचक डॉ. चंद्रकांत बांदिवडेकर के निधन से शोक की लहर ..
मुंबई विश्वविद्यालय में 6 अगस्त को श्रद्धांजलि सभा, साहित्यिक एवं शैक्षणिक योगदान को किया जाएगा नमन!

मुंबई। हिंदी साहित्य, आलोचना और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बनाने वाले सुप्रसिद्ध आलोचक एवं मुंबई विश्वविद्यालय के हिंदी तथा तुलनात्मक साहित्य विभाग के पूर्व आचार्य एवं अध्यक्ष डॉ. चंद्रकांत बांदिवडेकर के निधन से साहित्यिक और शैक्षणिक जगत में शोक की लहर है। उपलब्ध सूचना के अनुसार उनका 29 जुलाई 2026 को 94 वर्ष की आयु में मुंबई में निधन हुआ। उनके निधन की स्वतंत्र ऑनलाइन सूचना भी सामने आई है। डॉ. बांदिवडेकर का नाम हिंदी साहित्य के गंभीर अध्येताओं और आलोचकों में सम्मान के साथ लिया जाता रहा है। महाराष्ट्र में हिंदी के अध्ययन-अध्यापन और साहित्यिक संवाद को व्यापक बनाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के अभिलेखों में भी डॉ. चंद्रकांत बांदिवडेकर का नाम विभाग में आमंत्रित विद्वानों की सूची में दर्ज है, जो अकादमिक जगत में उनकी सक्रियता और प्रतिष्ठा को रेखांकित करता है।

मुंबई विश्वविद्यालय में शोक सभा
मुंबई विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग द्वारा जारी सूचना के अनुसार, दिवंगत विद्वान की स्मृति को नमन करने के लिए गुरुवार, 6 अगस्त 2026 को दोपहर 3 बजे शोक सभा आयोजित की जाएगी। यह सभा जीव विज्ञान विभाग (Department of Life Sciences), मुंबई विश्वविद्यालय, विद्यानगरी, कलिना, सांताक्रुज (पूर्व), मुंबई–400098 के सभागार में संपन्न होगी। हिंदी विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर एवं अध्यक्ष डॉ. करुणाशंकर उपाध्याय की ओर से जारी शोक-सूचना में विश्वविद्यालय परिवार, साहित्यकारों, शिक्षकों, शोधार्थियों तथा डॉ. बांदिवडेकर से जुड़े लोगों से उनकी स्मृति को नमन करने के लिए सभा में सम्मिलित होने का आह्वान किया गया है।

आलोचना की गंभीर परंपरा के प्रतिनिधि
डॉ. बांदिवडेकर ने साहित्य को केवल अकादमिक अध्ययन तक सीमित नहीं रखा, बल्कि आलोचना को साहित्य और समाज के बीच वैचारिक संवाद के रूप में प्रतिष्ठित करने में योगदान दिया। उनका विद्वत व्यक्तित्व हिंदी और मराठी सहित भारतीय भाषाओं के साहित्यिक संसार के बीच संवाद की भावना से जुड़ा रहा। उनके निधन से एक ऐसे वरिष्ठ साहित्य साधक का अवसान हुआ है, जिसने लंबी आयु तक अध्ययन, अध्यापन और साहित्यिक चिंतन की परंपरा को समृद्ध किया। उनके विद्यार्थी, सहकर्मी और साहित्य प्रेमी उनकी विद्वत्ता तथा शैक्षणिक योगदान को लंबे समय तक स्मरण करेंगे। डॉ. चंद्रकांत बांदिवडेकर का जाना केवल एक व्यक्ति का निधन नहीं, बल्कि हिंदी आलोचना और मुंबई के हिंदी अकादमिक जगत की एक महत्वपूर्ण पीढ़ी की स्मृतियों का अवसान है। उनकी साहित्य-साधना आने वाली पीढ़ियों के शोधार्थियों और अध्यापकों के लिए प्रेरणा बनी रहेगी।
भावपूर्ण श्रद्धांजलि।

.. कौशल विनोद पाठक – विशेष संवाददाता / विशेष रिपोर्ट

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