पौधशाला (Nursery Plant) से निकलेगी हरियाली फौज, पौधे बदलेंगे तस्वीर?
नारनौल। महेंद्रगढ़ जिले की सूखी धरती को हरियाली की चादर ओढ़ाने की तैयारी शुरू हो चुकी है। जिले की छह सरकारी पौधशाला इन दिनों हरियाली की ‘फैक्ट्री’ बनी हुई हैं, जहां करीब साढ़े चार लाख पौधे तैयार किए जा रहे हैं। मानसून की दस्तक के साथ ही ये पौधे गांवों, सड़कों, स्कूलों, सरकारी संस्थानों और खाली पड़ी भूमि पर रोपे जाएंगे। वन विभाग का दावा है कि यह अभियान जिले के वन आवरण को बढ़ाने की दिशा में अब तक का सबसे बड़ा प्रयास साबित हो सकता है। जिले में तीन पौधशाला महेंद्रगढ़, दो नारनौल और एक भुगारंका में संचालित हैं। पौधशाला में नीम, बरगद, पीपल, कीकर, लसोड़ा, खैरी, बेरी, गूलर, सीरस और पहाड़ी पापड़ी जैसी स्थानीय जलवायु के अनुकूल प्रजातियां तैयार की जा रही हैं। ये पेड़ कम पानी में भी जीवित रह सकते हैं और आने वाले वर्षों में छांव, आक्सीजन तथा पर्यावरण संरक्षण का मजबूत आधार बनेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि स्थानीय प्रजातियों के पौधे न केवल तेजी से विकसित होते हैं बल्कि पक्षियों और अन्य जीवों के लिए भी अनुकूल वातावरण तैयार करते हैं। इन पौधशाला में पिछले कई महीनों से पौधों को तैयार किया जा रहा है ताकि वर्षा शुरू होते ही बड़े स्तर पर पौधारोपण किया जा सके। इस बार विभाग ने केवल पौधे तैयार करने पर ही नहीं, बल्कि उन्हें वर्षों तक सुरक्षित रखने की रणनीति भी बनाई है।
वन विभाग इस बार केवल पौधे बांटकर अपनी जिम्मेदारी खत्म नहीं करेगा। विभाग की योजना पौधों की देखरेख अवधि को तीन वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष करने की है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पौधशाला में तैयार किया गया पौधा वास्तव में पेड़ बनकर खड़ा हो। पिछले वर्षों में मुफ्त वितरण के बाद बड़ी संख्या में पौधे या तो रोपे नहीं गए या फिर देखभाल के अभाव में नष्ट हो गए। नई व्यवस्था में पौधों के संरक्षण और जीवित रहने की दर बढ़ाने पर सबसे ज्यादा जोर रहेगा।

