अमेरिका-ईरान वार्ता में तनाव, ट्रंप की धमकी से बातचीत अधर में ..
नई दिल्ली। स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही महत्वपूर्ण कूटनीतिक वार्ता उस समय तनावपूर्ण मोड़ पर पहुंच गई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कड़ी चेतावनी ने दोनों देशों के बीच बने संवाद के माहौल को प्रभावित कर दिया। यह वार्ता एक पूर्व समझौता (एमओयू) लागू करने और द्विपक्षीय संबंधों में सुधार की संभावनाओं को लेकर आयोजित की गई थी। सूत्रों के अनुसार अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस वार्ता को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से स्विट्जरलैंड पहुंचे थे। ईरानी प्रतिनिधिमंडल भी शनिवार को पूर्व में हुए समझौते के क्रियान्वयन पर चर्चा के लिए वार्ता स्थल पर पहुंचा था। दोनों पक्षों के बीच प्रारंभिक चर्चा जारी थी कि इसी दौरान राष्ट्रपति ट्रंप का एक सख्त बयान सामने आया। ट्रंप ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि ईरान ने अमेरिका की बात नहीं मानी तो उसे “भयानक दर्द” का सामना करना पड़ेगा। इस बयान के बाद वार्ता का माहौल अचानक बदल गया। बताया जाता है कि ईरान के मुख्य वार्ताकार और संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेरी घालीबाफ अमेरिकी रुख से नाराज होकर बैठक कक्ष से बाहर निकल गए, जिससे बातचीत बीच में ही रुक गई।
घालीबाफ ने बाद में सोशल मीडिया मंच एक्स पर अमेरिका की धमकियों को सिरे से खारिज करते हुए कहा, “यदि उनकी धमकियों में वास्तव में प्रभाव होता तो उन्हें इस प्रकार की हताशा का प्रदर्शन करने की आवश्यकता नहीं पड़ती। ईरान अमेरिकी धमकियों की परवाह नहीं करता। आवश्यकता पड़ने पर तेहरान उचित जवाब देने के लिए तैयार है।”
अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का मानना है कि यह घटनाक्रम पश्चिम एशिया में पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ा सकता है। ऐसे समय में जब वैश्विक समुदाय क्षेत्रीय स्थिरता और कूटनीतिक समाधान की उम्मीद कर रहा है, दोनों देशों के बीच बढ़ती बयानबाजी चिंताजनक संकेत मानी जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि वार्ता प्रक्रिया को सफल बनाने के लिए दोनों पक्षों को संयम और संवाद का रास्ता अपनाना होगा। धमकियों और आक्रामक बयानों से समाधान की संभावनाएं कमजोर पड़ सकती हैं। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या दोनों देश फिर से वार्ता की मेज पर लौटते हैं या यह गतिरोध और गहरा होता है। विश्व की निगाहें अब स्विट्जरलैंड में चल रहे इस कूटनीतिक घटनाक्रम पर टिकी हुई हैं, क्योंकि इसका प्रभाव केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे मध्य-पूर्व और वैश्विक राजनीति पर पड़ सकता है।
.. विशेष संवाददाता कौशल विनोद पाठक

