29.3 C
Uttar Pradesh
Monday, July 20, 2026

विवाह कोई व्यापार नहीं, बल्कि विश्वास, सम्मान और समानता का पवित्र बंधन?

विवाह कोई व्यापार नहीं, बल्कि विश्वास, सम्मान और समानता का पवित्र बंधन?

देश में दहेज प्रथा आज भी अनेक परिवारों की खुशियों को निगल रही है। हाल ही में प्रकाशित एक हृदयविदारक घटना में एक नवविवाहिता ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उसके पति ने उससे कहा – “सिंदूर अपने पैसों से लगाना, तुम मुझे समझ नहीं पाओगी… दूसरी शादी कर लूंगा।” इसके कुछ समय बाद संदिग्ध परिस्थितियों में उसकी मृत्यु हो गई। यह घटना केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए गंभीर चेतावनी है। दहेज की लालसा, मानसिक प्रताड़ना और घरेलू हिंसा आज भी समाज में गहरी जड़ें जमाए हुए हैं। कानून बनने के बावजूद कई बेटियां विवाह के बाद शोषण, अपमान और अत्याचार का सामना करती हैं। अनेक मामलों में पीड़िताएं अपनी पीड़ा व्यक्त भी नहीं कर पातीं और अंततः उनकी जिंदगी असमय समाप्त हो जाती है।

ऐसी घटनाएं यह प्रश्न खड़ा करती हैं कि क्या केवल कठोर कानून पर्याप्त हैं? आवश्यकता समाज की सोच बदलने की भी है। विवाह कोई व्यापार नहीं, बल्कि विश्वास, सम्मान और समानता का पवित्र बंधन है। दहेज की मांग करने वाले और महिलाओं को प्रताड़ित करने वालों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ सामाजिक बहिष्कार भी होना चाहिए। परिवारों को अपनी बेटियों को आत्मनिर्भर बनाने, अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाने और समय रहते कानूनी सहायता लेने के लिए प्रेरित करना होगा। प्रशासन को भी ऐसे मामलों की निष्पक्ष एवं त्वरित जांच सुनिश्चित करनी चाहिए ताकि दोषियों को शीघ्र दंड मिले और पीड़ित परिवार को न्याय प्राप्त हो। आज आवश्यकता है कि समाज एकजुट होकर यह संकल्प ले कि “दहेज नहीं, सम्मान चाहिए : बेटी बोझ नहीं, समाज की शक्ति है।” तभी ऐसी दर्दनाक घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सकेगा और आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित एवं सम्मानजनक जीवन मिल सकेगा।
.. कौशल विनोद पाठक – विशेष संवाददाता एवं विश्लेषक

ताजा खबर
सम्बंधित खबर

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें