हाल ही में बेस्ट बसों द्वारा हुई दुर्घटनाओं से जनमानस में आक्रोश?
यात्री सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल, जवाबदेही तय करने का समय..
मुंबई। मुंबई की जीवनरेखा कही जाने वाली बृहन्मुंबई इलेक्ट्रिक सप्लाई एंड ट्रांस पोर्ट (बेस्ट) की बसें एक बार फिर लगातार हो रही सड़क दुर्घटनाओं को लेकर चर्चा के केंद्र में हैं। हाल के दिनों में हुई दुर्घटनाओं ने आम नागरिकों के मन में भय और असुरक्षा की भावना पैदा कर दी है। इन घटनाओं के बाद जनमानस में गहरा आक्रोश व्याप्त है और लोग परिवहन व्यवस्था की सुरक्षा पर गंभीर प्रश्न उठा रहे हैं। बेस्ट बसें प्रतिदिन लाखों यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाती हैं। ऐसे में यदि इन्हीं बसों से दुर्घटनाएं होने लगें, तो यह केवल एक परिवहन संबंधी समस्या नहीं बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा का गंभीर विषय बन जाता है। नागरिकों का कहना है कि बस चालकों पर अत्यधिक कार्यभार, समय का दबाव, यातायात की चुनौती और नियमित प्रशिक्षण की कमी जैसी समस्याओं पर गंभीरता से ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल दुर्घटना के बाद जांच समिति गठित कर देना पर्याप्त नहीं है।
आवश्यकता इस बात की है कि दुर्घटनाओं के वास्तविक कारणों का वैज्ञानिक विश्लेषण किया जाए। यदि चालक की गलती है तो उसके लिए उचित कार्रवाई हो, लेकिन यदि सड़क की खराब स्थिति, तकनीकी खराबी, वाहन रखरखाव में लापरवाही या प्रशासनिक कमियां जिम्मेदार हैं, तो उनकी जवाबदेही भी निश्चित की जानी चाहिए। मुंबई जैसे महानगर में सड़क सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। प्रत्येक बस में आधुनिक सुरक्षा उपकरण, सीसीटीवी निगरानी, नियमित तकनीकी परीक्षण तथा चालकों का समय-समय पर स्वास्थ्य परीक्षण और प्रशिक्षण अनिवार्य किया जाना चाहिए। इसके साथ ही दुर्घटना संभावित क्षेत्रों की पहचान कर वहां विशेष यातायात प्रबंधन की व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए।
जनता की मांग है कि सरकार, बेस्ट प्रशासन और यातायात विभाग संयुक्त रूप से एक व्यापक सुरक्षा नीति तैयार करें, जिससे भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके। दुर्घटना में पीड़ित परिवारों को शीघ्र न्याय, समुचित मुआवजा और दोषियों के विरुद्ध पारदर्शी कार्रवाई भी उतनी ही आवश्यक है। मुंबई की पहचान उसकी तेज रफ्तार और व्यवस्थित सार्वजनिक परिवहन से है। यदि नागरिकों का विश्वास इस व्यवस्था से डगमगाने लगे, तो यह पूरे शहर के लिए चिंता का विषय होगा। इसलिए अब समय आ गया है कि दुर्घटनाओं पर केवल संवेदना व्यक्त करने के बजाय ठोस सुधारात्मक कदम उठाए जाएं, ताकि हर यात्री स्वयं को सुरक्षित महसूस कर सके।
.. विशेष विश्लेषण – कौशल विनोद पाठक

